शिक्षा के उद्देश्य

आज मै आपको इस पोस्ट के माध्यमसे शिक्षा के उद्देश क्या है? इसका बारे मे बतानेवाला हू l अगर आप शिक्षा के उद्देश्य जाननेकेलिए सिरीयस है, तो आप यह पोस्ट अंततक पढे ताकी आपको शिक्षा का उद्देश क्या है यह समज मे आये l

शिक्षा के उद्देश्य

आज हम सबलोग शिक्षा लेते है, आज हमे अनपढ शायद कोई मिल जाएगा लेकिन अल्मोस्ट लोग सोचते है शिक्षा के माध्यम से हम हमारी जिंदगी बाकी अनपढ लोगोंसे बेहतर कर सकते है l यह बात भी सही है, लेकिन केवल ऐसा ही करनेसे शिक्षा के उद्देश्य सफल नही हो पायेगा l

सभी लोग आज लगभग शिक्षा लेते है लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे है जिन्हें शिक्षा के सही अर्थ मालूम नही है l बस उन्हे लगता है शिक्षा के उद्देश लोगोंको केवल रोजगार दिलानेकी माध्यम है, लेकिन ऐसा कदापि नही है l यह एक शिक्षा के उद्देश्य हो सकता है, इससे यह भी सिद्ध नहो होता यह शिक्षा के एक प्रभावी उद्देश है l

हम शिक्षा के स्वरूप के आधार पर हम शिक्षा के उद्देश हम बता सकते है l ऐसा देखा जाए तो शिक्षा के उद्देश हम बता नही सकते क्योकी शिक्षा की व्याप्ती, शिक्षा स्वरूप बहुत बढा है l तो भी हम शिक्षा के कुछ महत्वपूर्ण उद्देश बता सकते है l

जीना सिखाना –

शिक्षा हमे बहुत कुछ सिखाते है, मनुष्य को किस तरह अपनी जिंदगी जीना चाहिए यह हमे यह शिक्षा के माध्यम से ही मिलता है l अपने जिंदगी मे आनेवाले चढ उतारे न डगमग ते हुए उसका मुकाबला करनेकी ताकत हमे कहांसे मिलता है? वह हमे शिक्षा से मिलती है l

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यह महत्वपूर्ण काम हमे शिक्षा से मिलती है, किसी भी तरह की समस्या क्यू न हो, उसे मिटानेकी, उसे रोखनेकी शक्ती शिक्षा से मिलती है, यह शिक्षा एक महत्वपूर्ण उद्देश है l शिक्षा ग्रहन किया हुआ व्यक्ती कभी समस्या से हिलता नही, बल्की कुछ सिखता है l इसीलिए यह एक शिक्षा के उद्देश्य है l

सही गलत सोचनेकी क्षमता विकसित करना –

ऐसे तो हर आदमी अपना जिंदगी गुजारनेकेलीए कुछ ना कुछ सिखता है जिस से वह अपनी जिंदगी आरामसे निकालते है l हां एक बात ध्यान रखना जरुरी है, इसको अपने माँ बाप से शिक्षा मिलती है तभी वह ऐसा कर सकता है l

शिक्षा के उद्देश्य
शिक्षा के उद्देश्य

शिक्षा लेनेकेबाद व्यक्ती ऐषाराम से जीना ही शिक्षा का उद्देश नही है, इसका आगे भी हमे कुछ करना होगा जिस से की समाजकेलीए, देशकेलिये कुछ फायदा हो l शिक्षा पानेकेबाद केवल पैसे कमाना और अपने जिंदगी ऐषाराम करना नही है l

शिक्षा का उद्देश यह है अच्छा पढा लिखा व्यक्ती से पूरे संसार को फायदा हो, समाज मे अनगिणत समस्याए मौजूद है जिन्हें दूर करनेमे पढे लिखे व्यक्ती का योगदान हो l पूरे जग समस्या से गिरे है जग इस समस्याओंसे बाहर निकालना ही शिक्षा के उद्देश्य है l

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शिक्षा लेनेकेबाद पैसे कमाना ही नही बल्की हमे सही क्या है और गलत क्या है यह सोचनेकी क्षमता हमारे मन मे विकसित होना बहुत जरुरी है, यह शिक्षा के उद्देश्य भी है l

व्यक्ती को रोजगार प्राप्त करने हेतू बनाना –

यह तो सब लोग जाणते है, शिक्षा लेनेकेबाद व्यक्ती कुछ कमाने लायक हो जाना जरुरी है जिस से की अपने परिवारवालोंकी इच्छा पुरी कर सके l अगर ऐसा करनेमे व्यक्ती असफल रहा तो माना जाता है उसका शिक्षा व्यर्थ है l यह भी जरुरी है की शिक्षा को रोजगार योग्य बनाना चाहिए l

शिक्षा लेनेकेबाद व्यक्ती कुछ कमाता ही नही तो अपनी जिंदगी जिने मे परेशानी आ सकती है वह अपनेलिए कुछ करने मे सक्षम नही है तो देश, समाजकेलीए क्या योगदान देगा l शिक्षा लेनेकेबाद अपनेलिए, अपने परिवारकेलीए, देशकेलिये कुछ करनेकेलीए सबसे पहिले वह आर्थिक रुपसे सक्षम होना जरुरी है l

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ऐसा करनेकेलीए व्यक्ती को आर्थिक रुपसे सक्षम बनाना शिक्षा के उद्देश्य माना जाता है, जनरली ऐसा देखा जाए तो यह बिलकुल सही है l

हसते हसते जीना –

संसार बहुत सारे समस्या से है, ठीक इसी इन्सान भी बहुत सारे समस्या से गिरे है l छात्र को शिक्षा पानेकेबाद समाज मे आना ही पढेगा और इसी तरह समस्या मे जरूर उलझ जाएगा, एक नही दो नही बहुत सारे समस्या आ जाएंगे l पास मे पैसा हो या ना हो समस्या तो जरूर आयेंगे, इसे लेकर चिंतीत होना बेकार है l यह छात्र को अपने पढाई की दशा मे अवगत कराना शिक्षा के उद्देश्य है l

छात्र को पहिलेही यह सिखाना जरुरी है वरना उसे अपना जिंदगी, जिंदगी नही नर्क के समान लगेगा जो बहुत बुरा है l उसे यह लगना चाहिए की समस्या आते और जाते रहते है इन्हें लेकर डरना नही बल्की कुछ सिखना है l

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छात्र को यह समजना चाहिये अपने जिंदगी हमे हसते, हसते जीना है, जब तक हमारी जान है तब तक हमे इसी तरह जीना है, इस तरह उन्हे कोई बतानेकी जरुरत नही है l यह छात्र को पहिलेसे पता होना चाहिए l हसते, हसते जीना ही शिक्षा उद्देश मे एक है l

पढना और लिखनेकी क्षमता विकसित करना –

शिक्षा हमे स्कूल के बगर बाहर से भी मिलती है, लेकिन छात्र को पढना और लिखणा आना बहुत जरुरी है केवल इनमेसे एक आनेसे काम नही होगा l भाषा समजनेकेलीए और लिखनकेलिए कुछ सांकेतिक चिन्हे हमे समजना होगा l जिस भाषा सिखना है उसका सांकेतिक चिन्हे लिखणा और उन्हे याद रखना अनिवार्य होता है l

शिक्षा के उद्देश्य
शिक्षा के उद्देश्य

यह सब छात्र को स्कूल और घर मे सिखाया जाता है, यह सिखना बहुत जरुरी है l जो भी हमे पढाया जाता है वो सब हमे जैसे का वैसा याद नही रहता l कभी कभी अपने पास समय भी नही रहता तो हमे वह लिख लेना होता है l कभी कभी बहुत बढे बुक या कुछ ओर होता है जिसे बादमे ही पढना होता है l

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इसलिए पढना और लिखणा यह शिक्षा के एक उद्देश है अगर किसी छात्र पढना या लिखणा नही सिख तो शिक्षा उद्देश पूरा नही हुआ ऐसा हम समज सकते है l यह इन्सान कभी कभी अपने काम पूरा करनेमे असफल भी हो जाता है l

तर्क से विचार करनेकी क्षमता विकसित करना –

शिक्षित इन्सान कभी भी बिना सोचे समजे अपना राय देते नही किसी भी बयान देनेकेलीए पहिले सोचते है और बादमे अपने राय बनाते है l जो भी देखते है तुरंत अपने राय नही बनाते पहिले उसका बॅकग्राऊंड देखते है और अपने राय देते है l

इस तरह किसी भी वस्तू या फिर व्यक्ती समुदाय पर अपने आंख बंद करके विश्वास नही करते उसका पीछे और आगे का सोचते है l शिक्षा इस तरह की पिढीतयार करती है l छात्र की दशा मे ये सारी बाते बताया जाता है l

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ऐसे छात्र की तयारी करना बहुत जरुरी है जो समाज मे अंधविश्वास है उसे रोखनेकेलीए बहुत बढी भूमिका निभाती है l शायद आनेवाले समय मे इसका और महत्व बढ सकती है इसलिए कहते है यह शिक्षा के उद्देश्य है, यह सही भी है l

संयम और साहस –

शिक्षा लेनेकेबाद व्यक्ती संयम और साहसी बन जाता है, किसी भी समय अपने विश्वास खो बैठते नही वाद विवाद के समय किसी से लढते नही उन्हे भी अपने विचार व्यक्त करनेकेलीए मौका देते है l शिक्षित व्यक्ती किसी को डरते भी नही l समय अनेपर अपने देश और समाजकेलीए लढते भी है l

शिक्षा के उद्देश्य
शिक्षा के उद्देश्य

शिक्षा के माध्यम से ऐसे पिढी बनाया जाता है, यह सब शिक्षा के उद्देश है, शिक्षा लेनेकेबाद व्यक्ती संयम बन ना चाहिए सबलोगोंका आदर करने वाले चाहिए होता है l सबको अपने साथ लेकेजानेवाला चाहिए यह सब तब हो पायेगा जब व्यक्ती संयमी हो l

व्यक्ती को संयम बनानेका काम शिक्षा का होता है, यह सब स्टुडन्ट लाईफ मे सिखाया जाता है, यह सिखाना भी बहुत जरुरी है l इसीलिए हम इसे बेशक शिक्षा उद्देश मानते है l

नेतृत्व गुण –

नेतृत्व गुण व्यक्ती के लिए बहुत जरुरी है, किसी समुदाय को या फिर देश चलानेके लिए इन्सान के अंदर नेतृत्व गुण होना जरुरी है l अगर यह किसी व्यक्ती पास नही तो दस लोगोंको भी जुटा नहीसकते इसलिए यह छात्र को अपनी विध्यार्थी दशा मे यह सिखाया जाता है किसी समुदाय को कैसे जुटाना और उन्हे कैसे संभालना ऐसा तो कंपलसरी नही है लेकिन स्टुडन्ट को जरूर सिखाते है l

इस से इन्सान निडर बनता है किसी भी समय भीड को संभालते है, यह काम करनेकी क्षमता छात्र की दशा से विकसित होती आयी है l शिक्षा के उद्देश्य मे यह एक अतिमहत्वपूर्ण उद्देश माना जाता है, सब बच्चे सिखते जरूर लेकिन यह जो उद्देश है पूरा नही कर पाते l

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Suresh Burla Sironcha Di- Gadchiroli State -Maharastra India

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