What is education?

What is education?

What is education?  Education क्या है? इस सवाल का जवाब  लगभग सबलोग जाणते है l कोई कहता है की क्लास मे जो पढाते है उसे Education कहा जा सकते है, जो time के हिसाब से हमे जो पढाते है उन्हे अध्यापक कहते है,और वो जो पढाते है उसे शिक्षा (Education )कहते है l ऐसे देखा जाए तो यह बात समाजमान्य है, सबको यही लगता है की हमे क्लास जो  पढाते है उसीको शिक्षा कहते है l माना की इसको जरूर शिक्षा कह जा सकते है, लेकिन ऐसा तो बिलकुल नही कह जा सकता केवल इसिको ही शिक्षा  कहे l

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केवल क्लास मे हमे जो पढाया जाता है उसिको ही शिक्षा (Education )नहीं कहते, ऐसे बहुत सारे फॅक्टर्स है जहाँपर हमे  शिक्षा दी जाती है मगर हमलोग उसे नजरअंदाज करते है l जिन्हें हमलोग शिक्षा के क्षेत्र ही नही मानते लेकिन वहींसें हमे नैतिक शिक्षा मिलती जो हमे सामाजिक जीवन मे सामंजस्य रखनेमे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है l जैसे की परिवार, बढे लोगोंकी बाते और माँ बाप की दिए हुए संस्कार, क्या कोई कहते है यह Education नही है? इनमे से कोई हमे डिग्री नही देंगे मगर जिनेका रास्ता जरूर बता देंगे तो इसलिए जब शिक्षा की बात आती है इन्हें नजर अंदाज नही किया जा सकता l

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यह दोनो फॅक्टर्स द्यान मे रखते हुए ऐसा कह जा सकता है की,” जो हमे केवल जिंदगी जीनेका रास्ताही दिखाती नही बल्की बेहतर से बेहतर जिंदगी जिनेको प्रेरीत करती है उसेही शिक्षा कहते है l”शिक्षा केवल आज रोजगार की माध्यम ही बनी है, जो कोई आज शिक्षा की ओर देखता है वह सिरफ कमानेकी दृष्टी से देखता है l शिक्षा के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा किस तरह कमाया जाता है इस सोच मे लोग दिन रात डूबे रहते है l सब को कमानेका माध्यम चाहिए होता है, जो education के रुपमे देखते है l लेकिन हमने जो विचार education के बारे सोचते है, वह कही ना कही गलत है, जो हमे विनाश के ओर धीरे धीरे ले चलता है वह हमे पत्ताही नही चलता इसे रोखना बहुत जरूरी है l 

Education का जो सही काम है उसे ना भुला जाए तो ही बेहतर होगा l जब सब लोग कमानेका सोच अपने मनमे रखते है तो अनजाने वह स्वार्थी बन ही जाता है, वह समाज सेवक, समाज रक्षक और ऍडमिनिस्ट्रेटिव्ह ऑफिसर क्यू न हो l आज प्रायमरी स्कूल से लेकर डिग्री कॉलेज तक ज्यादातार यही पढाया जाता है l किस तरीकेसे कमाया जाता है, कामाने के लिए क्या करे एक बार सोचीए अगर अध्यापक किसी छात्र को बार बार  ऐसे पढाने लगे तो स्टुडंट्स के मन कौनसे विचार गूजते रहेंगे? इस सवाल का जवाब यही होगा ना, जो अपलॊग अभी सोचते होंगे l इस प्रक्रिया मे अद्याप की कोई गल्ती नही क्यों की अध्यापक बीच बीच मे वो ही बात करेंगे समाज मे जो चल रहे होते है l 


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इस से क्या होगा समाज को जो सही ज्ञान की आवश्यकता होती वो पुरी नही हो पाती समाज मे जो सही संदेश (messege )जाना जरूरी होता है वह नही जाएगा l आखिरकार अध्यापक भी एक नोकरदार होता है अपने नोकरी बचाने के लिए सही गलत मे शायद जो भेद होता है वो भूल जाते है l अगर सही तरीके की education चल रहा है यह सही है या नही सोचने के लिए भी किसीके पास time नही है l आज जो भी पढाएगा वो यही बात करेगा नोकरी पक्की है यही अभी चल रहा है l

आज बढे बढे सिटी से लेकर छोटे छोटे सिटी तक बढे बढे पोस्टर लगे रहते है, जिसमे लिखा होता है 100%पास यानि जो बच्चा ऍडमिशन लेंगा वह पास होई जायेगा l और इसमे एक बात छिपी होती है की आपलोगोंको पैसा कमानेका जरिया मिल गया अपलॊग इसका फायदा ले सकते हो l(इस तरह संकेत छिपा रहता है ) काहींपे कोचिंग classes का पोस्टर छिपकया जाता है जिसमे भी यही लिखा होता है की की नोकरीकी ग्यारंटी रहती,  लेकिन किसी  पोस्टर मे यह लिखा नही रहताहै  की, जिसमे नीती, अनीती भ्रष्टाचार और संस्कार की, मेरा मतलब ऐसा कोई पोस्टर रहता ही नही, जिसमे भ्रष्टाचार के बारे मे लिखा हो l ऐसा कोई पोस्टर हमे दिखाई नही देगा l जब ऐसे इन्स्टिट्यूट मे  से छात्र पढाई करके अपने घर लौटता है, अपना व्यवसाय करने लगता है,वह क्या करेगा किसी भी मार्ग से पैसा जुठनेका काम करेगा, तब हमलोग बोलने लगते है भ्रष्टाचार कम करनेकी बाते,यह क्या अभी संभव है? नही वह उस दौर मे पढाई किया था जिस दौर मे सिरफ सिरफ कमाने के लीये मार्गदर्शन किया करते थे, पढाते  थे l अभी इसमे बदलाव लाना ना मुमकिनसा हो जाता है l 

देश के प्रशासनिक ऑफिसरस् होते है इन्हें भी अनजानेमे यही पाठ पढाते है देश के सेवा करते करते कभी कभी खुद कि जिम्मेदारीं भूल जाते है, अगर ऐसे भ्रष्टचार ऑफिसरस बढ गये तो समाज का क्या होगा। समाज मे ऐसी स्थिती पैदा हो जाएगी, जिसमे कोई किसीके उपर भरोसा नही रखेगा, ऐसे मे किसको दोष देना चाहिए सरकार या फिर समाज, मै तो कहूँगा समाज को दोष देना होगा क्यों की समाज मे जो पढे लिखे, समजदार होते है, जिन्हें सबकुछ मालूम होता है लेकिन समाज को अवगत नहीं कराते, ज्ञानी के साथ साथ डरपोक होते है l सरकार मे जो होते है वो भी समाज के एक हिस्सा ही होते है, इसलिए समाज को ही दोष देना चाहिए l  

Education का सही अर्थ :-

सबसे पहिले हमे education का सही अर्थ समझना होगा education वह  होता है,  जिसमे किसी भी तरह की समस्या की हल निकालने की ताकत होती है, जिसमे साहस होता है, जिसमे किसी भी समय अपने आपको संतुलित बनाये रखने मे व्यक्ती को सक्षम बनानेकी ताकत होती है। education का मतलब केवल क्लास मे जाकार पढाई करना और exam लिखणा इतनाही नही इसका व्यापक अर्थ है,  जिसे समजनेमे सालो लग जाएंगे। जब हमने सत्य और साहस का त्याग कर देते है और स्वार्थ और अनीतीका का मार्ग अपनाते है, तब हमलोग धीरे धीरे अंधःकार की ओर चला जाएंगे, जिसमे हमारे पतन तय है। शिक्षा का एक संकुचित अर्थ होता है,जिसमे समय सारणीके अनुसार पढाया जाता है l 

शिक्षा के प्रकार (Kinds Education ):

शिक्षा लेनेके आधार पर शिक्षा के प्रकार तय करते है, मुख्य रुपमे शिक्षा के तीन  रूप या प्रकार माना जाता है l 
1.औपचारिक शिक्षा (formal education )
2.अनौपचारिक शिक्षा ( informal education)
3.निरोपचारिक शिक्षा (Non formal education )
हमे अभी शिक्षा के इन प्रकारोंका थोडा बहुत विस्तार से चर्चा करते है ताकी समजनेमे आसान हो जाए l 

1.औपचारिक शिक्षा :

शिक्षा के इस प्रकार मे पढाई समय सारणीके अनुसार चलता है, इस प्रकार मे एक निश्चित अवधी, समय होता है,  जिसमे पढाया जाता है या फिर शिक्षा ली जाती है l जैसे की आज की शिक्षा व्यवस्था यानि आज स्कूल, कॉलेज मे जो पढाया जाता है, लिखाया जाता है यह सब औपचारिक शिक्षा के अंतर्गत ही आते है l औपचारिक शिक्षा की विशेषताएं यह मानी जाती है की, जिसमे परीक्षा ली जाती है, प्रमाण पत्र दी जाती है l इस प्रकार की शिक्षा शिक्षा व्यवस्था मे समय और पैसा जादा खर्च होता है l 

औपचारिक शिक्षा मे सबकुछ प्लॅनिंगसे चलते है, पढनेवाला एवं पढानेवाला सबकुछ जाणता है, जैसे की स्कूल, कॉलेज की  ऍडमिशन फी, परीक्षा फी यह सब पहिले से पता ही रहता है l इसमे छात्र को कार्यकुशल और समजदार बनाते जिस से की अपने जिंदगी आरामसे जी सके l जिस क्षेत्र मे या जिस विषय मे निपुण होना चाहते है उस मे निपुण हो सकते है मगर इसमे पैसा खर्च करनेकी जरुरत होती है l 

2.अनौपचारिक शिक्षा :

अनौपचारिक शिक्षा मे कोई प्लानिंग वगेरे नही रहता है एवं शिक्षा लेनेकी कोई निश्चित समय नही होता है l इसमे व्यक्ती अपने अनुभवसे सिखता है, व्यक्ती जन्म से लेकर अपनी मृत्यू तक कुछ ना कुछ सिखता है l इसकी व्यापकता औपचारिक शिक्षा के अपेक्षा बहुत बढा है, इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था मे कोई हमे अध्यापक रुपमे नही पढाते l अपने पडोस के, माँ बाप एवं बढे लोग हमे कुछ सिखाते है, जिस से की हमारे जिंदगी मेइस से  आसान हो जाए l 

इस प्रकार की  शिक्षा व्यवस्था मे पढनेकेलिए किसी स्कूल, कॉलेज की जरुरत नही होती है ना अध्यापक की एवं परीक्षा देनेकी जरुरत भी नही रहती l किसी परीक्षा की जरुरत होती ना किसी डिग्री की जरुरत होती है l व्यक्ती अपने अनुभव से इंटेलिजन्ट बनते जाते है इस प्रकार मे परीक्षा कभी भी ली जाती है यानि निसर्ग परीक्षा लेती है, जो की बहुत ही कठीण होता है l 

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3.निरोपचारिक शिक्षा :

निरोपकारी शिक्षा ना औपचारिक होती है ना ही औपचारिक इसमे दोनोंकी सम्मीलन होता है, इस प्रकार मे भी स्कूल, कॉलेज होते है एवं परीक्षा भी ली जाती है l इस प्रकार मे दूरस्थ शिक्षा, सतत शिक्षा,प्रौढ शिक्षा एवं खुले शिक्षा आदी के प्रकार आते है l जो औपचारिक शिक्षा लेने मे असमर्थ रहे उन्हे शिक्षा प्रधान करनेकी व्यवस्था इस प्रकार मे किया जाता है है l जो महिला पढाई बीच मे छोड दी, अभी पुरा करना चाहती है, तो इस माध्यम कर सकते है l पढाई करनेकेलिए कोई समय की बंधन नही होती है, अपने हिसाबसे पढाई कर सकते है l

जैसे औपचारिक शिक्षा लेनेकेलीए पैसा भरना पढता है ठीक इसी प्रकार इसमे भी भरना पढता है, लेकिन इसमे फ़रक है जैसे की औपचारिक शिक्षा मे परीक्षा के समय सारणी बहुत कठोर होता है, लेकिन इसमे लचिले होते है इसमे कभी भी बदल सकता है l

मैने तो यह बता दिया की शिक्षा क्या है? शिक्षा के प्रकार कितने है? शिक्षा का सही उपयोग किस तरीखीसे करे और आज समाज मे शिक्षा को लेकर  क्या विचार चालू है l शिक्षा सही अर्थ क्या लेना चाहिए यह सब मैने संक्षिप्त रूप से बतानेकी कोशिश की, शायद अपलोगोंको समजमे आया होगा l अगर यह पोस्ट अच्छा लगा तो अपने दोस्तोन्को शेर करे l 
धन्यवाद. 




Suresh Burla Sironcha Di- Gadchiroli State -Maharastra India